पशु बिक्री बैन पर मचा बवाल, ममता ने पूछा ‘रमजान के महीने में ही क्यों लिया गया फैसला’

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पशु बाजारों में कत्ल के लिए जानवरों की खरीद-फरोख्त पर लगाई गई रोक का देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध हो रहा है। कांग्रेस और लेफ्ट के बाद सोमवार को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में डीएमके ने सरकार पर हमला बोला। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पशु बिक्री पर प्रतिबंध का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने सरकार के इस आदेश की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि रमजान के महीने में ही यह फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने इस पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

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ममत बनर्जी ने केंद्र सरकार के वध के लिए गोवंश बिक्री पर बैन संबंधित फैसले का विरोध करते हुए कहा, ‘न तो हम इसे स्वीकार करने वाले हैं और न ही हम इसके लिए बाध्य हैं। यह असंवैधानिक है। यह ऐसी सरकार है जो गाय के लिए आधार कार्ड चाहती है। क्या खाना है क्या नहीं, यह सरकार निर्धारित नहीं करेगी।’ममता बनर्जी ने कहा कि सरकारें आती हैं और जाती हैं लेकिन आप लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के साथ नहीं खेल सकते। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगी। ममता ने कहा कि मोदी सरकार का यह फैसला राज्य की शक्तियों में केंद्र का सीधा दखल है जो अलोकतांत्रिक होने के साथ-साथ अनैतिक भी है।

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उधर, दक्षिण भारत के राज्यों में भी इस फैसले का विरोध हो रहा है। डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन प्रतिबंध के खिलाफ 31 मई को चेन्नै में प्रदर्शन करेंगे। डीएमके ने इस मुद्दे पर चुप्पी के लिए पलनीसामी सरकार पर भी हमला बोला है। मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि कड़े प्रतिबंधों के चलते तमिलनाडु के एंथियुर मवेशी बाजार में बिजनस प्रभावित हुआ है।

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