पनामा पेपर लीक: नवाज शरीफ़ को मिली क्षणिक राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दिया फिर से जांच करने का आदेश

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पनामा पेपर
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पनामागेट के नाम से चर्चित पनामा पेपर्स लीक से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ और उनके परिजनों की विदेशों में संपत्तियों के मामले की जांच के लिए जॉइंट इनवेस्टिगेटिव टीम (JIT) के गठन का आदेश दिया है। JIT को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। नवाज शरीफ भी JIT के सामने पेश होंगे। जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के बाद मामले की कोर्ट में फिर से सुनवाई होगी। JIT जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी।

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5 जजों की बेंच ने 3-2 के बहुमत से फैसला सुनाया। दो जज जस्टिस खोसा और जस्टिस गुलजार जेआईटी जांच के पक्ष में नहीं थे बल्कि वे नवाज शरीफ को पीएम पद के लिए अयोग्य घोषित करना चाहते थे। जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने 540 पेज लंबे फैसले को लिखा है। पनामागेट में नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम नवाज, हसन नवाज, हुसैन नवाज, शरीफ के दामाद रिटायर्ड कैप्टन मुहम्मद सफदर और वित्त मंत्री इशाक डार के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

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पनामा पेपर्स लीक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिजनों पर विदेशों में अघोषित संपत्तियां रखने का आरोप लगा था। सुप्रीम कोर्ट ने 23 फरवरी को भ्रष्टाचार से इस जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। फैसले के मद्देनजर इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा का इंतजाम किया गया था।

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अगले पेज पर पढ़िए- क्या है पनामा पेपर लीक मामला

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