चरमपंथ की नई लहर में सुलगता कश्मीर, पहले से ज्यादा खतरनाक हुए हालात

0
4 of 4Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

सीआरपीएफ के प्रवक्ता राजेश यादव कहते हैं, “हमारा पड़ोसी ही हर तरह की सहायता प्रदान करता रहा है, वही इन्हें भड़काता है। यहाँ कुछ लोग हैं जो पाकिस्तान के इशारे पर युवाओं को बरगलाते हैं, उनका ब्रेन वॉश करते हैं।”

अजहर कादरी कहते हैं कि समय के साथ अलगाववादी संगठन हुर्रियत अपना असर खो चुकी है। नई मिलिटेंसी ने जो रोल मॉडल दिए हैं, उससे हुर्रियत का एजेंडा साइड लाइन हो चुका है।”

इसे भी पढ़िए :  जम्मू कश्मीर नीति सुरक्षा के साथ साथ मानवीय भी होना चाहिए: महबूबा

कादरी के मुताबिक, “यह अधिक खतरनाक है, गहरा है, और देर तक कायम रहने वाला है। यह पूरी तरह से स्थानीय है। इसे रोकना बहुत मुश्किल है। अगर पाकिस्तान चाहेगा भी तो ये मिलिटेंसी बंद नहीं होगी। अगर कोई समाधान भी खोजा जाए तो यह नहीं रोका जा सकेगा।”

इसे भी पढ़िए :  PM के बयान से तिलमिलाया पाक, कहा- आतंक पर ब्रिक्स को गुमराह कर रहे हैं मोदी

राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध है, बातचीत के रास्ते बंद हैं और राजनीतिक प्रक्रिया ठप है। कश्मीर के युवाओं में बेबसी की भावना से बेचैनी पैदा हो रही है।

इसे भी पढ़िए :  चेज के शतक ने वेस्टइंडीज को हार से बचाया, ड्रा हुआ दूसरा टेस्ट

बेबसी और निराशा के माहौल में बिजबिहाड़ा के बासित जैसे कई नौजवान एक बार फिर चरमंपंथ की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कश्मीर के सभी हलकों में यह चिंता बढ़ती जा रही है कि अतीत की तरह कश्मीरियों की नई पीढ़ी भी कहीं चरमपंथ की भेंट न चढ़ जाए।

 

4 of 4Next
Use your ← → (arrow) keys to browse