‘महिलाएं भी दे सकती हैं तीन तलाक’

0
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

बोर्ड ने बहुविवाह के मसले पर पिछले साल सितंबर में कहा था, ‘कुरान, हदीस और सर्वमान्य मत मुस्लिम पुरुषों को 4 पत्नियां रखने की इजाजत देता है।’ बोर्ड ने कहा था कि इस्लाम बहुविवाह की इजाजत तो देता है लेकिन इसे प्रोत्साहित नहीं करता। बोर्ड ने साथ में यह भी कहा था कि बहुविवाह पुरुषों की वासना की पूर्ति के लिए नहीं है बल्कि यह एक सामाजिक जरूरत है।

इसे भी पढ़िए :  यूपी चुनाव का बजा बिगुल : ओपनियन पोल ने उड़ाई पार्टियों की नींद ! क्या कहती है यूपी की जनता और कौन होगा अगला सीएम ? देखिए-विशेष चर्चा 'पोल में झोल' COBRAPOST DEPTH

 

तीन तलाक के मसले पर अदालती सुनवाई के विरोध में वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह अलग-अलग विद्वानों की व्याख्या है, लेकिन तीन तलाक को अहले हदीस में पूरी मान्यता है। संविधान की कसौटी पर कसने के मुद्दे पर सिब्बल ने कहा कि तीन तलाक आस्था का मामला है जिसका मुस्लिम बीते 1400 वर्ष से पालन करते आ रहे हैं। इसलिए इस मामले में संवैधानिक नैतिकता और समानता का सवाल नहीं उठता है। मुस्लिम संगठन ने तीन तलाक को हिंदू धर्म की उस मान्यता के समान बताया जिसमें माना जाता है कि भगवान राम अयोध्या में जन्मे थे। उन्होंने कहा कि इस्लाम के उदय होने के समय वर्ष 637 से तीन तलाक अस्तित्व में है। इसे गैर इस्लामी बताने वाले हम कौन होते हैं। कोर्ट इसे तय नहीं कर सकता। तीन तलाक का स्रोत हदीस में है और यह पैगम्बर मोहम्मद के समय के बाद अस्तित्व में आया।

इसे भी पढ़िए :  चीन में रोजा रखने वाले करीब 100 वीगर मुसलमानों को मिली ये सजा, सरकारी नियम तोड़ने पर लगा जुर्माना
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse