भारत में पाकिस्तानी बच्चा बना सबसे छोटा बोन मैरो डोनर

0
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

बीमारी को जानलेवा बताते हुए डॉक्टरों ने कहा कि इस स्थिति में बीमारी का एकमात्र समाधान अस्थि मज्जा प्रतिरोपण है। जीनिया में जन्म के समय से ही आंशिक एल्बिनिस्म भी पाया गया।

भाषा की खबर के अनुसार, नारायण हेल्थ सिटी हॉस्पिटल के पीडियट्रिक हीमेटोलॉजी, ओंकोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के प्रमुख और सीनियर कंसलटेंट डॉ सुनील भट ने कहा कि लड़की में एचएलएच के निदान के बाद हमें पता चला कि उसके भाई रेयान का हयूमन ल्यूकोसाइट एंजीजेन उससे मिलता है।

इसे भी पढ़िए :  अब यूनाइटेड नेशन में लगा पाकिस्तान को तगड़ा झटका

डॉ भट्ट ने कहा कि डोनर की आयु मात्र आठ माह है इसे देखते हुए अस्थिमज्जा निकालने की प्रक्रिया को कुछ सप्ताह में दो बार अंजाम देने का फैसला किया गया।

इसे भी पढ़िए :  JNU के लापता छात्र नजीब का हुआ था अपहरण! घरवालों को आई 20 लाख की फिरौती के लिए कॉल

मज्जा निकालने के लिए छोटी सुइयों का इस्तेमाल किया गया और इस दौरान विशेषज्ञों के एक दल से सहायता ली गई। अंतत: हमने जीनिया का इलाज करने के लिए जरूरी अस्थिमज्जा निकाल लिया। रेयान ने न सिर्फ अपनी बहन को बचाया, इसके साथ ही वह भारत में सबसे छोटा मज्जा डोनर भी बन गया।

इसे भी पढ़िए :  किसानों की आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, केंद्र व राज्यों को भेजा नोटिस
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse