शरीफ़ और सेना में ठनी

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शरीफ की पार्टी पीएमएल (एन) के सांसद राणा मुहम्मद अफजल ने यहां तक सवाल उठा दिया कि आखिरकार हाफिज सईद जैसा आतंकी सरगना हमारे के लिए कौन-सा अंडे दे रहा है जिसके कारण हम उसे पाले हुए हैं। नवाज की पार्टी को डर है कि दो साल बाद होने वाले चुनाव में उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पिछले सात दशक से पाकिस्तान के नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाली और जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को अपनी बात मानने के लिए मजबूर करने वाली पाक सेना आसानी से इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है। सेना मौजूदा हालात को सरकार की कूटनीतिक नाकामी से जोड़ रही है। पाक सेना का कहना है कि सरकार पाकिस्तान का पक्ष दुनिया के सामने ठीक ढंग उठाने में नाकाम रही है। इसी का नतीजा है कि दुनिया का कोई भी देश कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ नहीं है। सेना को डर है कि कहीं आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई आगे जाकर सेना के अधिकार को सीमित करने तक नहीं पहुंच जाए।

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सबसे बड़ा डर आतंकियों में दिख रहा है। पिछले तीन दशक में भारत के खिलाफ बड़े-से-बड़े आतंकी हमले के बाद भी जिस पाकिस्तान में वे सुरक्षित महसूस करते थे, वही अब महफूज नहीं रहा। आतंकियों को डर है कि आगे किसी भी हमले के बाद भारत बदले की कार्रवाई जरूर करेगा और पाक सेना तथा सरकार उसे रोक नहीं पाएगी। पाक सेना से उनकी नाराजगी सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए आतंकियों के शवों को दफनाने के तरीके को लेकर भी है। सेना ने जवानों के शव दिन में उठाए और पूरे सम्मान के साथ उन्हें दफनाया भी। वहीं, आतंकियों को केवल रात में अपने साथियों के शव उठाने की अनुमति दी गई और उन्हें चुपके से दफना दिया गया। आतंकियों को यह भी डर है कि सरकार और आम जनता के दबाव के आगे पाक सेना उनके खिलाफ कार्रवाई करने को मजबूर न हो जाए।

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