नवरात्र स्पेशल: क्या है नौ देवियों का महत्व और कैसे करें इनकी पूजा? पढ़िए- व्रत के जायकेदार व्यंजन

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नवरात्र
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नवरात्र के दिनों में माँ के अलग अलग स्वरूपों को निहारने का सुन्दर त्यौहार है। जैसे कोई शिशु अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने रहता है, वैसे ही हम अपने आप में परा प्रकृति में रहकर – ध्यान में मग्न होने का इन 9 दिन का महत्व है। वहाँ से फिर बाहर निकलते है तो सृजनात्मकता का प्रस्सपुरण जीवन में आने लगता है।

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हमारी चेतना के अंदर सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण है। प्रकृति के साथ इसी चेतना के उत्सव को नवरात्र कहते  है। इन 9 दिनों में पहले तीन दिन तमोगुणी प्रकृति की आराधना करते हैं, दूसरे तीन दिन रजोगुणी और आखरी तीन दिन सतोगुणी प्रकृति की आराधना का महत्व है ।

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माँ की आराधना- दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती ये तीन रूप में माँ की आराधना करते है| माँ सिर्फ आसमान में कहीं स्थित नही हैं, उसे कहते हे की-

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“या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते” – “सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही माँ / देवी तुम स्थित हो”

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