J&K : खतरे में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार

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पीडीपी-बीजेपी
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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर की पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. हाल में हुए श्रीनगर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कम वोटिंग को लेकर इन दिनों सार्वजनिक व निजी दोनों ही रूप से पीडीपी-बीजेपी  एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रही हैं। घाटी में पत्थरबाजों और हिंसक भीड़ से निपटने का तरीका दोनों ही ओर से हो रही बयानबाजी का केंद्र है। पीडीपी की कहती है कि घाटी के हालात पर बीजेपी की राजनीति ‘टकराव को बढ़ाने वाली’ है, जबकि बीजेपी का कहना है कि पीडीपी ‘तुष्टीकरण’ की राजनीति कर रही है। बीजेपी मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से लगातार कहती रही है कि वह पत्थरबाजों के खिलाफ सख्य कार्रवाई करें और नैशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति के दबाव में ना आएं।

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वहीं कश्मीर को लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस उलझन की वजह से सुरक्षा तंत्र तबाह हो रहा है। एक सीनियर अधिकारी ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर बताया, ‘जब हम पत्थरबाजों को गिरफ्तार करते हैं तो हमें उन्हें छोड़ने के लिए राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उनमें से कई पीडीपी और नैशनल कॉन्फ्रेंस से होते हैं। दोनों ही पार्टियां कानून-व्यवस्था को कमजोर करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करती हैं।’

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पीडीपी के एक नेता ने बताया, ‘यह दो विरोधी पार्टियों के बीच हुई एक असंगत साझेदारी थी। बीजेपी आरएसएस की राजनीतिक शाखा है जिसका मकसद धर्मनिरपेक्ष भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाना है।’ पीडीपी कश्मीर के मौजूदा हालात के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताती है। उसका कहना है कि बीजेपी के अलगाववादियों और पाकिस्तान से राजनीतिक बातचीत खत्म करने के फैसले और घाटी के लोगों को विश्वास में नहीं लेने की वजह से हालात बिगड़ गए।

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