कॉनफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलेट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसियेशन के बैनर तले सामूहिक उपवास पर बैठने वाले इन जवानों का कहना है कि अर्द्धसैनिक बलों के रिटायर्ड जवानों की हालत काफी खराब है। हर साल सैकड़ों जवान देश के अंदर माओवादी और आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवा देते हैं। आईटीबीपी के जवान 18 हजार की फीट पर चीन से लगी सरहद पर तैनात रहते हैं, वहीं बीएसएफ के जवान पाकिस्तान से लगी सीमा पर आतंकवादियों से लोहा लेते हैं, लेकिन इन दोनों सरहदों पर सेना के जवान के मुकाबले उन्हें सुविधा कम मिलती है, बल्कि मरने पर भी उनके परिवार को मुआवजा काफी कम मिलता है।