‘नरेंद्र मोदी अभी संयम बरत रहे हैं, मगर पाकिस्‍तान इसे हल्‍के में लेने की गलती न करे’

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समाचार पत्र ने कहा कि वह व्यापार में सबसे तरजीही राष्ट्र का दर्जा भी पाकिस्तान से वापस ले सकते हैं। पाकिस्तान को 1996 में यह दर्जा दिया गया था जिसका उसने कभी प्रतिफल नहीं दिया। स्टिम्सन सेंटर के साउथ एशिया कार्यक्रम के उपनिदेशक समीर लालवानी ने ‘फॉरेन अफेयर्स’ में प्रकाशित एक लेख में कहा कि उरी हमले के मद्देनजर भारतीय नीति निर्माओं की स्वाभाविक नाराजगी एवं निराशा बड़ी सैन्य कार्रवाई के लिए गति बना रही है। लालवानी ने कहा, ‘‘लेकिन इस कार्रवाई के लिए दलीलें ,भले ही सही नहीं हों, लेकिन बड़ी चर्चा का विषय हैं।’’ उन्होंने कहा कि बड़ी सैन्य प्रतिक्रिया बदले की इच्छा को संतुष्ट कर सकती है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह भारत सरकार के राजनीतिक हितों, विश्वसनीयता, प्रतिष्ठा के संदर्भ में कारगर होंगी या नहीं।

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कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के जॉर्ज पेरकोविच ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लक्ष्यों के खिलाफ छोटे स्तर पर ‘जैसे को तैसा’ की कार्रवाई करने के बजाए भारत के लिए सबसे कारगर तरीका यह है कि वह पाकिस्तान को दंडित करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने के वास्ते शेष दुनिया को राजी करे ।

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