मुसलमानों के बाद एक और समुदाय ने ‘समान नागरिक संहिता’ पर उठाए सवाल

0
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

याचिका में कहा गया कि नगा, गोंड, बैगा आदि जनजातियों में बहुविवाह का प्रचलन है। जबकि टोडा, रोडा, खासा, तियान, आदि जनजातियों में बहुपति विवाह प्रचलन है। साथ ही जनजातियों में तलाक की प्रक्रिया बेहद सरल है।

इसे भी पढ़िए :  SC ने अनुराग ठाकुर को BCCI अध्यक्ष पद से हटाया, चलेगा अवमानना का केस !

एक मामूली समारोह के तहत विभिन्न आधारों पर तलाक संभव है। साथ ही जनजाति समुदाय के लोग एक से अधिक महिला के साथ शादी कर सकते हैं। हिंदू विवाह अधिनियम,1955 के तहत यह पाबंदी उन पर लागू नहीं होती।

इसे भी पढ़िए :  सीएम नीतीश पर बरसी शहाबुद्दीन की बीवी, कहा- बदला ले रहे हैं मुख्यमंत्री

साथ ही संगठन का कहना है कि समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य का काम है न कि अदालत का। साथ ही यह भी कहा गया है कि संविधान में अनुसूचित जनजातियों को विशेष प्रावधान केतहत संरक्षण प्राप्त है।

इसे भी पढ़िए :  जन्माष्टमी की कई परम्पराओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, फैसले पर गरमाई सियासत

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक और बहुविवाह आदि मसले पर सुनवाई कर रहा है। इसी दौरान समान नागरिक संहिता का मसला भी सामने आया है।

2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse