देश से बाहर भेजे जाएंगे रोहिंग्या मुसलमान, ये है प्लान

0
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

क्या है रोहिंग्या मुसलमानों का इतिहास-

1826 में प्रथम एंग्लो-बर्मा युद्ध के बाद म्यांमार में ब्रिटेन का शासन हो गया। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेश से लाकर लोगों को राखिन में लाकर बसाना शुरू कर दिया। बांग्लादेश से जाकर राखिन में बसे ये वही लोग थे जिन्हें आज रोहिंग्या मुसलमानों के तौर पर जाना जाता है

इसे भी पढ़िए :  भारत-पाक को साथ जीना और साथ मरना है: महबूबा मुफ्ती

म्यांमार में एक अनुमान के मुताबिक़ 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं।जनरल  विन की सरकार ने 1982 में राष्ट्रीयता कानून लागू कर रोहिंग्या म‍ुस्लिम को नागरिकता देने से इनकार कर दिया है।

इसे भी पढ़िए :  जम्मू-कश्मीर में सेना के कैंप पर आत्मघाती हमला, कैप्टन समेत 3 जवान शहीद, 2 आतंकी भी ढेर

साल 2012 में म्यांमार के राखिन राज्य में हुए सांप्रदायिक दंगों ने वहां से मुस्लिमों का पलायन तेज कर दिया। उत्तरी राखिन में रोहिंग्या मुसलमानों और बौद्ध धर्म के लोगों के बीच हुए इस दंगे में 50 से ज्यादा मुस्लिम और करीब 30 बौद्ध लोग मारे गए।

इसे भी पढ़िए :  अगर भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ परमाणु युद्ध, तो क्या होगा अंजाम यहां पढ़ें।

 

2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse