चीन ने किया दावा : समुद्री लुटेरों का अकेले ही किया था सामना

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इस घटना की जानकारी देते हुए इंडियन नेवी के सूत्रों ने बताया था कि 8 अप्रैल की देर रात नौसेना को अदन की खाड़ी में एक विदेशी व्यापारिक पोत के मुसीबत में फंसे होने की सूचना मिली थी। इस जहाज पर समुद्री डाकुओं ने हमला किया था। भारतीय नौसेना के कुछ जहाज- तरकश, त्रिशूल और आदित्य उसी वक्त अदन की खाड़ी से गुजर रहे थे। इन्होंने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मुसीबत में फंसे उस व्यापारिक पोत को घेर लिया। भारतीय युद्धपोतों ने इस जहाज के कप्तान से संपर्क किया। लुटेरों से बचने के लिए जहाज के कप्तान ने नियमों के मुताबिक क्रू मेंबर्स के साथ खुद को स्ट्रॉन्ग रूम में बंद कर लिया था।

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कोई भी कार्रवाई करने से पहले पूरी स्थिति को समझने की कोशिश करते हुए भारतीय नौसेना के हेलिकॉप्टर रात के अंधेरे में उस जहाज के आसपास के हालात का जायजा लेने लगे। इसके बाद इंडियन नेवी जहाज के ऊपरी डेक से समुद्री डाकुओं को हटाने की कोशिश करने लगी। सुबह होने पर समुद्री डाकू ऊपरी डेक पर दिखाई नहीं दे रहे थे। इसके बाद भारतीय नौसेना द्वारा सुरक्षा दिए जाने और ‘ऑल क्लियर सिग्नल’ मिलने पर उस जहाज के क्रू मेंबर्स का साहस बढ़ा और टीम के कुछ सदस्य धीरे-धीरे स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकले। इसके बाद समुद्री डाकुओं के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग दिखाते हुए नजदीक में ही तैनात चीनी नौसेना के जहाज से एक दल इस प्रभावित जहाज पर पहुंचा। भारतीय नौसेना के हेलिकॉप्टर ने उस जहाज को हवाई सुरक्षा मुहैया कराई। जहाज की तलाशी के बाद पता चला कि समुद्री डाकू रात में भाग गए थे। चालक दल के सभी 19 सदस्य सुरक्षित पाए गए थे।

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