बाद में ऊंट इस गाड़ी में शव को लेकर कर्णा के एयर फोर्स कालोनी स्थित उनके घर ले गया। हत्या और बिना सिर के शव घर पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। मुकदमा दर्ज हुआ और जांच भी लेकिन कर्णा भील के शव का पता नहीं चल सका। बिना सर के परिवार ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया और उनके शव को घर के नजदीक ही यह सोचकर दफन कर दिया कि जब सर मिलेगा तब अंतिम संस्कार की रस्म पूरी कर ली जाएगी। लेकिन 28 साल लगभग तीन दशक बीतने को है आज तक उनके सिर का पता नहीं चल सका।
कर्णा के बेटे बोधा राम बताते हैं कि उनके परिवार को उम्मीद है कि एक दिन उनका सिर वापस मिलेगा जिसके बाद वह अपने पिता का अंतिम संस्कार करेंगे। कर्णा भील के बारे में बताया जाता है कि 8 फुट लंबी मूंछों के कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज था। हालांकि उन्हें क्षेत्र का बड़ा डकैत माना जाता है जिसकी वजह से उन्हें जेल की सजा भी हुई थी। बेटे बोधा बताते हैं कि उनके पिता बहुत अच्छा नाद बजाया करते थे, इतना अच्छा कि एक बार पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी उनसे नाद की धुनें सुनने के लिए जैसलमेर आए थे।
नाद सुनकर वह इतना मंत्रमुग्ध हुए कि उनकी बाकी सजा माफ कर दी। वहीं पुलिस के अनुसार कर्णा की हत्या में चार लोग शामिल थे जिनमें पाकिस्तान के सत्तो निवासी कयाम, मेहराब खान और जैसलमेर के पेथोदाई निवासी हुसैन और रेदमल शामिल थे। बताया जाता है कि कर्णा ने कयाम के पिता इलयास की हत्या कर दी थी। उसी का बदला लेने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया गया































































