भारत बना रहा है स्टेल्थ फाइटर, चीन और पाकिस्तान में हड़कम्प, जानिए क्या है खासियत

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नई दिल्ली : भारत हवाई क्षेत्र में भी अमेरिका, चीन जैसे दिग्गज देशों को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। सैन्य ताकत में पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवा चुका भारत अपना खुद का स्टेल्थ फाइटर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। उधर, अमेरिका में भी भारत की हवाई ताकत को बढ़ाने के लिए मदद देने की आवाज उठी है। दो टॉप सेनेटर ने डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन से भारत को F-16 लड़ाकू विमान बेचने के लिए पत्र लिखा है।
भारत की स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने की योजना फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है। AMCA एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान होगा। इसमें दुश्मनों से निपटने के लिए और हवा में उन्हें मात देने के लिए कई तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह अत्याधुनिक विमान भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा। इस लड़ाकू विमान का डिजायन मल्टी रोल के तहत तैयार किया गया है। इसे मिराज 2000 और जगुआर फाइटर जेट की जगह वायु सेना में शामिल करने का प्रस्ताव है। इस बीच, भारत और रूस संयुक्त रूप से पांचवीं पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट तैयार करने पर चर्चा कर रहे हैं। अभी दोनों देशों के बीच इसे बनाने के तौर-तरीके पर बात चल रही है।

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स्टेल्थ फाइटर AMCA सुपरसोनिक रफ्तार से उड़ान भरेगा। इसका कुल वजन 25 टन होगा। यह लगातार दो घंटे तक उड़ान भर सकता है। इसमें AESA रेडार, इंफ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम लगा होगा। इसके अलावा सिचुएशनल अवेयरनस सेंसर्स लगे होंगे। लड़ाकू विमान के ढांचे के निर्माण में मजबूती और खुफिया तंत्र को भेदने का बेहद ख्याल रखा गया है। इसकी बॉडी को अलग-अलग मटीरियल से तैयार किया जाएगा। इसमें रेडार को चकमा देने वाले पेंट्स होंगे। इमसें दो टर्बोफैन्स वाले बेहतरीन ताकतवर इंजन लगे होंगे। इसे अपग्रेड भी किया जा सकता है। विमान का पिछला हिस्सा भी खास तरीके से तैयार किया गया है, जो दुश्मन को मात दे सके। इसका डिजाइन इस तरह होगा कि इसमें ज्यादा हथियार रखे जा सकें। इसमें 4 मिसाइल या बम रखने की क्षमता होगी। बाहरी भाग में लड़ाकू विमान के हर डैने पर हथियार के लिए 3 पॉइंट दिए गए हैं।

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वायु सेना, डीआरडीओ और एयरनॉटिकल डिवेलपमेंट एजेंसी एक समझौते के तहत AMCA प्रॉजेक्ट पर काम करेंगे। अगर सबकुछ ठीक रहा तो अडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के नाम से तैयार होने वाला यह लड़ाकू विमान 2030 के करीब अपना पहला उड़ान भर सकता है। इसके कुछ साल बाद उसका उत्पादन भी शुरू हो जाएगा।
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