MCD चुनाव से पहले बढ़ी केजरीवाल की मुश्किलें, शुंगलू रिपोर्ट माना ‘आप’ ने उड़ाईं कानून की धज्जियां

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कमेटी ने कई मुद्दों पर सरकार के फैसले पर सवाल खङे किये हैं-
कमेटी ने दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक के सलाहकार पद पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी की नियुक्ति को गलत बताया है।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के दफ्तर के लिए आवंटित बंगले के फैसले को भी अनुचित बताया है

स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष को घर मुहैया कराने पर भी सवाल उठाए गए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक AAP विधायक अखिलेश त्रिपाठी को अनुचित ढंग से टाइप 5 बंगला आवंटित कर दिया

निकुंज अग्रवाल को स्वास्थ्य मंत्री का ओएसडी बनाए जाने पर सवाल उठाया गया है। अग्रवाल अरविंद केजरीवाल के रिश्तेदार हैं।

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इसके अलावा दिल्ली में CCTV लगाने, मोहल्ला क्लीनिक और भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए फोन नंबर 1030 शुरू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इतना ही नहीं दूसरी बार सत्ता में आने के बाद आप सरकार ने संविधान और अन्य कानूनों में वर्णित दिल्ली सरकार की विधायी शक्तियों को लेकर भी बिल्कुल अलग नजरिया अपनाया था। इसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के 25 फरवरी 2015 के उस बयान का भी हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि कानून व्यवस्था, पुलिस और जमीन से जुड़े मामलों की फाइलें ही उपराज्यपाल की अनुमति के लिये वाया मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जायेंगी।

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इसमें कहा गया है कि तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग ने दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार को लेकर महाधिवक्ता से परामर्श कर 15 अप्रैल 2015 को मुख्यमंत्री केजरीवाल को कानून के पालन की नसीहत दी थी.

इसके उलट 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री के सचिव की ओर से सभी विभागों को निर्देश जारी कर कहा गया कि जमीन, कानून व्यवस्था और पुलिस से जुड़े मामलों को छोड़कर विधानसभा के विधायी क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी मामलों पर सरकार बेबाकी से फैसले कर सकेगी जबकि जमीन, कानून व्यवस्था और पुलिस से जुड़े मामलों में उपराज्यपाल की पूर्वानुमति से पहले संबद्ध फाइल को मुख्यमंत्री के मार्फत ही उपराज्यपाल के पास भेजा जाए। रिपोर्ट में आला अधिकारियों के तबादलों में भी उपराज्यपाल की अनदेखी की फेहरिस्त दी गयी है।

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इस तरह के आरोपों से केजरीवाल की छवि बिगड़ सकती हैं, खास तौर पर जब दिल्ली नगर निगम के चुनाव अभी सिर पर हो।

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