सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को लेकर पढ़िये सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

0
राष्ट्रगान
Prev1 of 3
Use your ← → (arrow) keys to browse

उच्चतम न्यायालय द्वारा एक जनहित याचिका पर सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के अपमान को लेकर सरकार से इस स्पष्टीकरण की मांग की है कि किन परिस्थितियों में और किस प्रकार से राष्ट्रगान का अपमान होता है। दरअसल सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाता है लेकिन कुछ लोग इस बात का विरोध जताते हैं कि राष्ट्रगान के समय कई लोग खड़े न होकर उसका अपमान करते हैं जो कि राष्ट्र के हित में नहीं होता। इसलिए याचिका को लेकर यह भी मांग की जा रही है कि किसी भी कार्यक्रम के शुरू होने से पहले राष्ट्रगान के लिए उचित नियम और प्रोटोकॉल तय किया जाए।

इसे भी पढ़िए :  सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'किसानों की खुदकुशी के बाद मुआवजा देना समस्या का हल नहीं'

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया जिसमें ‘राष्ट्रीय सम्मानों का अपमान रोकथाम अधिनियम 1971’ के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है और यह आरोप भी लगाया गया है कि ऐसी विभिन्न परिस्थितियों में राष्ट्रगान गाया जाता है जो स्वीकार्य नहीं है। श्याम नारायण चौकसे की जनहित याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गयी है कि देशभर में सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए और इसे बजाने तथा सरकारी समारोहों और कार्यक्रमों में इसे गाने के संबंध में उचित नियम और प्रोटोकॉल तय होने चाहिएं जहां संवैधानिक पदों पर बैठे लोग मौजूद होते हैं। मामले में सुनवाई अब 30 नवंबर को होगी।

इसे भी पढ़िए :  कई गुना बढ़ी भारत की ताकत, नौसेना में शामिल हुई कलवरी श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी 'खांदेरी'

अगली स्लाइड में पढ़े क्या क्या है राष्ट्रगान के लिए प्रावधान। 

Prev1 of 3
Use your ← → (arrow) keys to browse