सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को लेकर पढ़िये सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

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वकील अभिनव श्रीवास्तव के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया कि राष्ट्रगान का सम्मान होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को इसके प्रति उचित सम्मान दिखाना चाहिए। इसमें राष्ट्रगान के कथित अपमान से बचने के कुछ सुझाव भी दिए गए। याचिका के अनुसार, ‘किसी वित्तीय लाभ या किसी तरह के फायदे के लिए इसका व्यावसायिक उपयोग नहीं होना चाहिए। राष्ट्रगान के पूरा होने तक बीच में कोई अवरोध नहीं होना चाहिए और किसी भी वक्त इसे संक्षिप्त स्वरूप में नहीं गाया जाएगा।’ याचिका में कहा गया है, ‘राष्ट्रगान का नाटकीयकरण नहीं होना चाहिए और इसे किसी मनोरंजन आधारित कार्यक्रम में नहीं गाया जाना चाहिए।’

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इसमें यह भी कहा गया है कि जो लोग राष्ट्रगान को नहीं समझते, उनके सामने तब तक इसे नहीं गाया जाना चाहिए, जब तक वे इस बात से उचित तरीके से अवगत नहीं हों कि भारत का राष्ट्रगान कब बजाया जाता है और उन्हें इसके प्रति सम्मान दिखाना है। याचिका में ऐसे कुछ वाकयात का भी जिक्र किया गया जिनमें कथित रूप से राष्ट्रगान का अपमान किया गया, जिनमें एक मामले में चीजों को नाटकीय रूप देने के लिए मनोरंजन आधारित शो में इसे बजाये जाने का उदाहरण दिया गया।

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अगली स्लाइड में पढ़े इसी तरह के मामले पर चेन्नई हाईकोर्ट ने राष्ट्रगान के अपमान को भ्रामक बताया था।

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