आज नौंवा नवरात्र और रामनवमी: सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी मां सिद्धिदात्री, राम लगाएंगे बेड़ा पार

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राम नवमी के दिन मंदिर, मकान पर ध्वजा, पताका, तोरण और बंदनवार आदि से सजाने का विशेष विधान है। पर्व के दिन कलश स्थापना और राम जी के परिवार की पूजा करनी चाहिए, और भगवान श्री राम का दिनभर भजन, स्मरण, स्तोत्रपाठ, दान, पुण्य, हवन और उत्सव मनाते हैं। रामनवमी के दिन, श्रद्धालु बड़ी संख्‍या में उनके जन्‍मोत्‍सव को मनाने के लिए राम जी की मूर्तियों को पालने में झुलाते हैं।

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राम नवमी का दिन भारतीय जीवन में पुण्य पर्व माना जाता हैं। इस दिन सरयू नदी में स्नान करके लोग पुण्य लाभ कमाते हैं। कहते हैं, रामनवमी पर्व के पावन दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना का श्रीगणेश किया था। रामचरितमानस की रचना की रचना अवधी भाषा में की गई है।

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रामनवमी की पूजा के लिए आवश्‍यक सामग्री रोली, ऐपन, चावल, जल, पीले फूल, तुलसी के पत्ते, मिष्टान्न, घंटी और शंख हैं। पूजा के बाद परिवार की सबसे छोटी महिला सदस्‍य सभी लोगों को टीका लगाती है। पहले जल, रोली और ऐपन चढ़ाया जाता है, फिर मूर्तियों पर मुट्ठी भरके चावल चढ़ाये जाते हैं।

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