योगी आदित्यनाथ के मंत्रालय पहुंची उन्हीं के भड़काऊ भाषण के केस की फाइल, जानिए क्या करना चाहती है पुलिस

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योगी आदित्यनाथ अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। बुधवार (22 मार्च) को उन्होंने राज्य में मंत्रालयों का बंटवारा किया। वहीं राज्य के गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी उन्होंने अपने पास ही रखी है। इसी बीच सीएम योगी आदित्यनाथ के मंत्रालय में ऐसे केस की फाइल पहुंची हैं जिसका संबंध सीधे उन्हीं से है। राज्य पुलिस ने इस केस से जुड़े आरोपियो पर मुकदमा चलाने की आधिकारिक इजाजत मांगी है जिसमें स्वयं योगी आदित्यनाथ भी एक आरोपी हैं। आदित्यनाथ के अलवा गोरखपुर एमएलए राधामोहन दास अग्रवाल और बीजेपी राज्य सभा एमपी शिव प्रताप शुक्ला भी इस केस में आरोपी हैं। पुलिस ने आईपीसी की धारा 153-A (धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने) के तहत चार्जशीट दायर करने की आधिकारिक अनुमती की मांग की है। मामला जनवरी 2007 में गोरखपुर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा है।

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27 जनवरी 2007 से एक दिन पहले (26 जनवरी) को कुछ लड़कों द्वारा एक महिला से छेड़छाड़ के बाद साम्प्रदायिक हिंसा फैल गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला से छेड़छाड़ होन के बाद, आरोपी लड़कों का कुछ दूर तक पुलिस ने पीछा किया लेकिन लड़के मोहर्रम के जुलूस का फायदा उठाकर भीड़ में घुलमिल गए। इसी बीच मोहर्रम के जुलूस में फायरिंग भी हुई जिसमें कुछ लोग घायल हुए और फिर दो गुटों के बीच हिंसा फैल गई। इस मामले को लेकर परवेज परवाज नाम के एक पूर्व पत्रकार ने एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट के मामले में दखल देने के बाद 26 सिम्बर 2008 को एफआईआर दर्ज हुई। एफआईआर के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने के लिए भड़काऊ भाषण दिए थे जिसमें उन्होंने हिंदू युवा की मृत्यु के बदले की बातें कही थीं।

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