GST के क्या हैं फायदे, क्या होगा नुकसान, जानें सभी बातें विस्तार से

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ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर को बिक्री के बाद उसे केवल 7.20 लाख (18-10.80) रुपये ही अदा करने होंगे। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। क्योंकि जीएसटी में सेवाएं भी शामिल हैं, तो उसने मैन्युफैक्चरिंग में जो बिजली खर्च की है और उस पर सर्विस टैक्स के रूप में जीएसटी का जो भुगतान किया है, वेयरहाउस के इस्तेमाल का सविर्स टैक्स दिया है और जो दूसरी सविर्सेज के लिए टैक्स दिए हैं, वे सब भी इनपुट टैक्स क्रेडिट के तौर पर उसकी अंतिम देनदारी में से घटेंगे। यह प्रक्रिया फिर डिस्ट्रीब्यूटर से डीलर, डीलर से रीटेलर और रीटेलर से कन्जयूमर तक दोहराई जाएगी।

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जीएसटी के फायदे

जीएसटी मौजूदा टैक्स ढांचे की तरह कई जगहों पर न लग कर सिर्फ डेस्टिनेशन पॉइंट पर लगेगा। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक किसी सामान पर फैक्ट्री से निकलते समय टैक्स लगता है और फिर रीटेल पॉइंट पर भी जब वह बिकता है, तो वहां भी उस पर टैक्स जोड़ा जाता है। जानकारों का मानना है कि टैक्सेशन के नए सिस्टम से जहां भ्रष्टाचार में कमी आएगी, वहीं लालफीताशाही भी कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

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