मणिपुर में जीत कर भी हार गई कांग्रेस, BJP ने कम सीटों के बावजूद किया सरकार बनाने का दावा पेश

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मणिपुर

मणिपुर में किसी को भी पार्टी को स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं मिलने के बाद सत्‍ता के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। सरकार बनाने को लेकर संग्राम जारी है, ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही बहुमत होने का दावा कर रही हैं। हालांकि इस बीच बीजेपी ने कांग्रेस के एक विधायक को तोड़ कर अपने खेमे में मिला है और 32 विधायकों के समर्थन का दावा किया।

बीजेपी के उत्तर पूर्वी भारत के प्रभारी राम माधव और हिमंत बिस्व शर्मा ने राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला के सामने एक अनौपचारिक शक्ति प्रदर्शन में 32 विधायकों की परेड कराई। इनमें कांग्रेस विधायक एंड्रो श्याम कुमार और तृणमूल कांग्रेस के विधायक रविंद्र सिंह भी शामिल थे।

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21 सीटें जीतने वाली बीजेपी की तरफ से पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के संयोजक हेमंत बिस्‍व सरमा का कहना है कि उनके पास 30 विधायकों के समर्थन के खत हैं और 31वें विधायक की समर्थन की चिट्ठी जल्‍दी ही गवर्नर के पास भेजी जाएगी। इससे पहले बीजेपी महासचिव राम माधव ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से मिलकर नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के समर्थन से राज्य में सरकार गठन का दावा पेश करेगी। माधव ने कहा, “हम राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से मिलेंगे और उनसे कहेंगे कि भाजपा को मणिपुर में सरकार बनाने का न्योता दें, जिसे एनपीपी और लोजपा का समर्थन है।”

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भाजपा ने मणिपुर विधानसभा चुनाव में 21 सीटें जीती है, और उसने अपने सहयोगी नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की चार सीटों और एनपीपी की चार सीटों, लोजपा की एक सीट और एक निर्दलीय के समर्थन के साथ सरकार गठन के लिए आवश्यक न्यूनतम 31 सदस्यों की संख्या जुटा ली है। माधव ने कहा, “मैं भाजपा को समर्थन देने के लिए एनपीपी और लोजपा को धन्यवाद देता हूं। मैं बदलाव और प्रगतिशील मणिपुर के लिए मतदान करने के लिए मणिपुर के लोगों को भी धन्यवाद देता हूं।” इस मौके पर एनपीपी के अध्यक्ष कोनराड संगमा ने कहा, “मैं राज्य में बदलाव के लिए वोट देने हेतु मणिपुर के लोगों को धन्यवाद देता हूं।”

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गौरतलब है कि मणिपुर में 60 सदस्यों वाली विधानसभा में दोनों ही प्रमुख पार्टियां 31 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करने में नाकाम रहीं और प्रदेश को त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति देखनी पड़ी। भारतीय जनता पार्टी को नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) से समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है जो जो केंद्र में राजग तथा नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस में सहयोगी है। दोनों दलों ने चार-चार सीटें जीती हैं। लोक जनशक्ति पार्टी, जो राजग में सहयोगी है, ने भी एक सीट जीती। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस और निर्दलीय के खाते में भी एक-एक सीट गई है। एनपीएफ, एनपीपी और एलजेपी सभी ने अलग-अलग विधानसभा चुनाव लड़ा था।