सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी कहानी: भारतीय जवान थे पूरी तरह तैयार … बस अंधेरी रात का था इंतजार

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मेजर सूरी की टीम ने पहले इलाके की रेकी की। सूरी ने टीम को आदेश दिया कि वे आतंकियों को उनके एक लॉन्चपैड पर खुले इलाके में चुनौती दें। सूरी और उनके साथी टार्गेट के 50 मीटर के दायरे के अंदर तक पहुंच गए और वहां दो आतंकियों को ढेर कर दिया। इनको ठिकाने लगाते ही मेजर सूरी ने पास के जंगलों में हलचल देखी। यहां दो संदिग्ध जिहादी मौजूद थे। उनके मूवमेंट पर एक यूएवी के जरिए भी नजर रखी जा रही थी। सूरी ने अपनी सेफ्टी की परवाह न करते हुए दोनों आतंकियों को नजदीक से चुनौती दी और उन्हें भी ढेर कर दिया।

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एक अन्य मेजर को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि इन लॉन्चपैड्स पर नजदीक से नजर रखे। यह अफसर अपनी टीम के साथ हमले के 48 घंटे पहले ही एलओसी पार कर गया। इसके बाद से हमले तक इस टीम ने टार्गेट पर होने वाले हर मूवमेंट पर नजर रखी। उनकी टीम ने इलाके का नक्शा तैयार किया। दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियारों की तैनाती की जगह का पता लगाया। उन जगहों की भी जानकारी जुटाई, जहां से हमारे जवान मिशन के दौरान सुरक्षित रहकर दुश्मन पर फायरिंग कर सकें।

इस अफसर ने एक हथियार घर को तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए। हमले के दौरान यह अफसर और उनकी टीम नजदीक स्थित एक अन्य हथियार घर से हो रही फायरिंग की जद में आ गए। अपनी टीम पर मंडरा रहे खतरे को भांपते हुए इस मेजर ने बड़ा साहसिक कदम उठाया। वह अकेले ही रेंगते हुए इस हथियार घर तक पहुंचा और फायरिंग कर रहे उस आतंकी को भी खत्म कर दिया। इस अफसर को शौर्य चक्र से नवाजा गया है।

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तीसरा मेजर अपने साथी के साथ एक आतंकी शेल्टर के नजदीक पहुंचा और उसे तबाह कर दिया। इस वजह से वहां सो रहे सभी जिहादी मारे गए। इसके बाद, उसने हमला करने वाली दूसरी टीमों के सदस्यों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। यह अफसर ऑपरेशन के दौरान आला अधिकारियों को ताजा घटनाक्रम के बारे में लगातार अपडेट देता रहा। इस मेजर को भी शौर्य चक्र मिला है।

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चौथे मेजर को सेना मेडल मिला है। उसने दुश्मनों के ऑटोमैटिक हथियार से लैस एक ठिकाने को बेहद नजदीक से एक ग्रेनेड हमले में तबाह कर दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए।

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