सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी कहानी: भारतीय जवान थे पूरी तरह तैयार … बस अंधेरी रात का था इंतजार

0
3 of 3Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

यह सर्जिकल स्ट्राइक इतना आसान ऑपरेशन भी नहीं था। हमला करने वाली एक टीम आतंकियों की जोरदार गोलाबारी में घिर गई। पांचवें मेजर ने तीन आतंकियों को रॉकेट लॉन्चर्स के साथ देखा। ये आतंकी चौथे मेजर की अगुआई में ऑपरेशन को अंजाम दे रही टीम को निशाना बनाने वाले थे। हालांकि, इससे पहले कि ये आतंकी कुछ कर पाते, पांचवें मेजर ने अपनी सेफ्टी की परवाह न करते हुए इन आतंकियों पर हमला बोल दिया। दो को उसने ढेर कर दिया, जबकि तीसरे आतंकी को उसके साथी ने मार गिराया।

इसे भी पढ़िए :  गृहमंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश के बाद BSF ने पंजाब में खाली कराए पाक बॉर्डर से सटे गांव

इस मिशन में न केवल अफसरों, बल्कि जूनियर अफसरों और पैराट्रूपर्स ने भी अदम्य साहस का परिचय दिया। शौर्य चक्र से सम्मानित एक नायब सूबेदार ने आतंकियों के एक ठिकाने को ग्रेनेड बरसाकर तबाह कर डाला। इसमें दो आतंकी मारे गए। जब उसने एक आतंकी को अपनी टीम पर फायरिंग करते देखा तो उसने अपने साथी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद उसने आतंकी पर हमला बोल दिया और उसे ठिकाने लगा दिया।

इसे भी पढ़िए :  प्रद्युम्न की हत्या से आहत हुए नीतीश, किया खट्टर से निष्पक्ष जांच का अनुरोध

इस ऑपरेशन के दौरान किसी भी भारतीय जवान को अपनी शहादत नहीं देनी पड़ी। हालांकि, निगरानी करने वाली टीम का एक पैराट्रूपर ऑपरेशन के दौरान घायल हो गया। उसने देखा कि दो आतंकी हमला करने वाली एक टीम की ओर बढ़ रहे हैं। पैराट्रूपर ने उनका पीछा किया, लेकिन गलती से उसका पांव एक माइन पर पड़ गया। इस धमाके में उसका दायां पंजा उड़ गया। अपनी चोटों की परवाह न करते हुए इस पैराट्रूपर ने आतंकियों से मोर्चा लिया और उनमें से एक को ढेर कर दिया।

इसे भी पढ़िए :  Rio Live:  जारी है गोल्ड मेडल के लिए महामुकाबला दूसरा सेट स्पेन की कैरोलिना के नाम

ये पूरी कहानी नवभारत टाइम्स के सौजन्य से हमने आप तक पहुंचाई है, नवभारत टाइम्स ने कुछ सैनिकों के नाम उनकी पहचान छिपाने के मकसद से कहानी में नहीं छापे गए हैं।

 

3 of 3Next
Use your ← → (arrow) keys to browse