गर्भवती पत्नी को जिंदा जलाकर मार डाला, सुप्रीम कोर्ट ने दिया जीवनदान

0
गर्भवती
Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse

नई दिल्ली : मौत की सजा के खिलाफ चल रहे कैंपेन को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से प्रोत्साहन मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज के लिए अपनी गर्भवती पत्नी और बेटे को जिंदा जलाकर मारने वाले शख्स की मौत की सजा बरकरार रखने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मौत की सजा न्यायपालिका के सुधार के सिद्धांत के खिलाफ है। हालांकि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर मामलों की लिस्ट में आता है लेकिन कोर्ट ने अलग रुख अपनाया। शुक्रवार को जस्टिस पीसी घोष और आरएफ नरीमन की बेंच ने कहा, ‘आज देश में मौत की सजा किसी अपराध के लिए सबसे बड़ी सजा के रूप में स्थापित हो चुकी है, जो न्याय व्यवस्था में सुधार के सिद्धांत के खिलाफ है। सबूतों और हालात को ध्यान में रखते हुए इस मामले में मौत की सजा दिया जाना संभव नहीं है।’

इसे भी पढ़िए :  चीफ इमाम ने कहा, पाकिस्तान के एजेंट है कश्मीर के अलगाववादी, बातचीत हो बंद

कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपी को ताउम्र जेल में रखे जाने का फैसला भी सजा का जरूरी क्राइटीरिया पूरा करता है। यह कहते हुए कोर्ट ने आरोपी निसार रमजान सैयद को 2010 में अपनी गर्भवती पत्नी और बेटे की हत्या के आरोप में अपनी बाकी की जिंदगी जेल में गुजारने की सजा सुनाई।

इसे भी पढ़िए :  कश्मीर में सेना के शिविरों पर खतरा बनकर मंडरा रहे हैं 250 आतंकी

अगले पेज पर पढ़िए- किन मामलो में है फांसी का प्रावधान

Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse