क्या सच में सूर्य नमस्कार और नमाज मिलते-जुलते हैं?

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किन मौलाना साजिद रशीदी ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया। मौलाना ने भी चैनल पर लाइव नमाज पढ़कर दिखाई। मौलाना ने कह, ‘योगी जी ने नमाज के साथ जो जोड़ा है। मैं खुद नमाज करके दिखाता हूं। आप खुद इंसाफ कीजिएगा कि यह कितना योग से मिलता है। आप खुद ही फैसला करें कि इसे योग के साथ या फिर सूर्य नमस्कार के साथ जोड़ना कितना सही है।’

लाइव नमाज पढ़ते हुए मौलाना ने कहा, ‘हमारे नमाज पढ़ने और सूर्य नमस्कार या योग का तरीका बिल्कुल अलग है। दोनों में अलग-अलग क्रियाएं हैं।’ साथ ही उन्होंने कहा कि नमाज हम लोग अल्लाह का आदेश है और यह हमें अल्लाह से जोड़ती है। अल्लाह से जुड़ने के साथ ही, नमाज पढ़ने से व्यायाम भी होता है। अगर नमाज को इस नजरिए से भी सोचा जाता है कि इसके जरिए आप व्यायाम भी कर रहे हैं तो इसें कुछ गलत नहीं है।’

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