चुनाव जीतते ही यूपी बीजेपी में फूट की आशंका, जानिए क्यों

0
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ी जीत दिलाने वालों में केशव प्रसाद मौर्य की भूमिका से कोई इनकार नहीं कर सकता। सीएम बनें या नहीं लेकिन इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि नतीजों के बाद से ही केशव प्रसाद मौर्य सीएम की रेस में रहे हैं।

केशव प्रसाद के पक्ष में सबसे बड़ी बात ये है कि वो प्रदेश में बीजेपी का सबसे बड़ा ओबीसी चेहरा हैं। केशव संघ से भी जुड़े रहे हैं। जिस तरह पीएम मोदी कभी चाय बेचा करते थे, उसी तरह केशव प्रसाद मौर्य ने भी घर का खर्च चलाने के लिए चाय बेची थी।

इसे भी पढ़िए :  सपा में दंगल जारी, नरेश उत्तम बनाए गए पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष

संघर्ष केशव मौर्य की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा है। पारिवारिक हो या राजनीतिक केशव ने संघर्ष भी किया और हर संघर्ष में जीतते भी रहे।

इसे भी पढ़िए :  BJP नेता का PM को खत, 'जिस नेता के दो से ज्यादा बच्चे हो वह चुनाव न लड़े'

मौर्य साल 2007 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े थे। लेकिन इलाहाबाद वेस्ट सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सिराथू सीट से 2012 में समाजवादी पार्टी की लहर के बावजूद बीजेपी से जीते। 2014 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद की फूलपुर सीट से तीन लाख से ज्यादा वोट से जीते। मौर्य ने वीएचपी नेता अशोक सिंघल के साथ काफी वक्त तक काम किया।

इसे भी पढ़िए :  UP चुनाव: बीजेपी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में मुरली मनोहर जोशी और वरुण गांधी को मिली जगह
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse