अखिलेश की एक और महत्वकांक्षी योजना पर सीएम योगी की नजर, बंद हो सकती है ‘साइकिल ट्रैक’ योजना

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सीएम योगी
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स्मार्टफोन योजना और पेंशन स्कीम के बाद अब योगी सरकार की नजर अब साईकिल ट्रैक योजना को सामाप्त करने पर हैं। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इस साईकिल ट्रैक का खूब प्रचार प्रसार किया था। साईकिल समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी है। सरकार के साईकिल ट्रैक हटवाने के पीछे कहीं न कहीं एक राजनीतिक संदेश भी छिपा है। यह साईकिल ट्रैक पूर्ववर्ती सरकार ने लखनऊ, कानपुर और कुछ अन्य बड़े शहरों में बनवाये थे।

 

 

शहरी विकास राज्य मंत्री गिरीश यादव ने कहा कि नई सरकार साइकिल ट्रैक का व्यवहार्यता अध्ययन कराने की योजना बना रही है ताकि उसकी उपयोगिता का आकलन किया जा सके। ‘साइकिल’ समाजवादी पार्टी का चुनाव निशान है, जिसने पांच साल उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सत्ता संभाली।सपा के राजनीतिक विरोधी साइकिल ट्रैक के इर्द गिर्द लाल-हरे रंग की सीमा रेखा बनाने पर भी ऐतराज कर चुके हैं क्योंकि वे इसे सपा के प्रचार का साधन मानते हैं। सपा का झंडा लाल हरे रंग का है। यादव ने कहा कि साइकिल ट्रैक की व्यवहार्यता का अध्ययन कराया जा रहा है। राज्य सरकार को इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।

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गौरतलब है कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार ने लखनऊ, कानपुर, नोएडा, बरेली तथा अन्य बड़े शहरों में यह ट्रैक बनवाया था। इसके पीछे सपा सरकार का संदेश था कि इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और लोगों की सेहत दुरूस्त रहेगी। हालांकि प्रदेश के कई शहरों में अब इन साईकिल ट्रैक पर अवैध पार्किंग होती है और ठेला दुकानदारों ने इन पर अतिक्रमण कर रखा है। बरेली के सैटेलाईट इलाके में 850 मीटर का साईकिल ट्रैक है जिसे बनवाने में करीब 6.48 करोड़ रूपये की लागत आई थी। इस ट्रैक पर अब ठेला दुकानदारों का कब्जा है तथा आटो रिक्शा एवं अन्य वाहनों की पार्किंग होती है।

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आप को बता दें कि योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पूर्ववर्ती समाजवादी सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। योगी सरकार ने अखिलेश सरकार की समाजवादी एम्बुलेंस योजना से समाजवादी शब्द हटा दिया था तथा इसी तरह पेंशन योजना से भी समाजवादी शब्द हटा दिया गया है।

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