दुनिया में फैल रहे चरमपंथी इस्लाम के पीछे इस अरब देश का हाथ!

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चरमपंथी इस्लाम

दुनिया में फैल रहे चरमपंथी इस्लाम के पीछे सऊदी अरब का हाथ माना जा रहा है। इस बात को पश्चिम के देश भी मानने लगे हैं। यहां तक की हिलरी क्लिंटन और डॉनल्ड ट्रंप भी इस बात पर एक मत हैं। दोनों ही इस्लाम में कट्टरता के पीछे सऊदी अरब की उग्र मान्यताओं को दोषी मानते हैं। हिलरी ने कहा है कि सऊदी उन रैडिकल स्कूलों और मस्जिदों को अपना समर्थन देता है, जो युवाओं को उग्रवाद के रास्ते पर भेज रहे हैं। वहीं, ट्रंप सऊदी को आतंकवाद का सबसे बड़ा फंडर मानते हैं।

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ऐसा ही नजरिया मुस्लिम देशों में दूत के तौर पर तैनात रहे और 80 देशों में घूम चुके फराह पंडित का भी है। फराह पंडित लिखते हैं कि अगर सऊदी खुद को नहीं रोकेगा तो इसके कूटनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दुष्परिणाम उठाने पड़ेंगे।

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दुनियाभर के टीवी पंडित और कॉलमनिस्ट जिहादी हिंसाओं के लिए सऊदी को दोषी ठहराते आए हैं। एचबीओ के बिल महर ने भी सऊदी की शिक्षा को ‘मध्ययुगीन’ विशेषण से नवाजा है। इंटरनैशनल स्कॉलर फरीद जकारिया ने वॉशिंगटन पोस्ट में लिखा कि ‘सऊदी ने इस्लाम की दुनिया में एक राक्षस का सृजन किया है।’

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अब यह विचार आम हो गया कि सऊदी कठोर, धर्मांध, पितृसत्तात्मक और कट्टरपंथी इस्लाम ‘वहाबीवाद’ का प्रणेता है। इस वहाबी विचारधारा से वैश्विक उग्रवाद और आतंकवाद को ईंधन मिलता है। दुनिया भर में जितनी तेजी से आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के हमले बढ़े हैं, इस्लाम पर सऊदी प्रभाव की एक पुरानी बहस प्रासंगिक हो गई है।