अनपढ़ों के लिए वरदान है शिक्षण की ये नई शैली

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दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के एक इलाके में छात्रों के लिए पढ़ाई को आसान बनाने के लिए शिक्षण की नई शैली का उपयोग किया जा रहा है। जिससे बच्चे ना सिर्फ मन लगाकर पढ़ाई पर ध्यान देते हैं, बल्कि इस पहल से उनके रिज़ल्ट में सुधार हुआ है।

गांव के सरकारी स्कूलों में एक गैर सरकारी संगठन ‘एजुकेट गर्ल’ द्वारा चलाया जाने वाला यह कार्यक्रम पढ़ाई की एक नई शैली का प्रारंभिक सत्र है। पढ़ाई की यह नई शैली राष्ट्र स्तर पर गणित और भाषा के मामले में लगातार पिछड़ रहे बच्चों के स्तर को सुधारने का एक प्रयास है। यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि सार्वभौमिक शिक्षा के क्षेत्र में 1.2 लाख करोड़ रुपए (17.7 बिलियन डॉलर) के निवेश के बावजूद अपने देश में छात्र पूरी तरह से रोजगार प्राप्त करने के लिए तैयार नहीं हो पाते हैं।

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बच्चों के काफी समय से चली आ रही ब्लैकबोर्ड,चॉक और रट्टा लगाने वाली शैली के बजाय राजस्थान के अजमेर, बूंदी, जालोर, पाली, राजसमंद और सिरोही के छह जिलों में बच्चों को नई शैली के साथ पढ़ाया जा रहा है।

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यहां बच्चों को शब्दों की बजाय चित्रों के जरिये समझाया जाता है। ये बात जानते तो हम सब थे लेकिन इसे सच इस संस्था द्वारा बनाया गया है।

वर्ष 2015 में राजस्थान के 3399 ग्रामीण स्कूलों में, कक्षा 3, 4 और 5 के 79695 छात्रों के साथ इस नई शैली को आजमा के देखा गया। उनके साथ एक सप्ताह में स्कूल घंटों के दौरान लिंग और सामाजिक पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करते कम से कम दो बारऐसे रचनात्मक-शिक्षण सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों से, हिंदी में 45 फीसदी, अंग्रेजी में 26 फीसदी और गणित में 44 फीसदी तक अंकों की बढ़ोतरी देखी गई।

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