H-1B वीज़ा मामला : ट्रंप के खिलाफ़ लामबंद हुईं भारतीय IT कंपनियां

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नई दिल्ली : देश की दिग्गज टेक्नॉलजी कंपनियों के प्रमुख इस महीने वॉशिंगटन जाकर वीजा नीति सख्त करने के खिलाफ अपनी राय रखेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मंशा H-1B वीजा प्रोग्राम को कड़ा करने की है। नैशनल असोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) के चीफ आर. चंद्रशेखर ने बताया कि 20 फरवरी को भारतीय कंपनियों के सीईओज अमेरिकी सांसदों से बात कर प्रेजिडेंट ट्रंप की भावना के विरुद्ध H-1B वीजा प्रोग्राम के लिए शर्तें बढ़ाने की बुनियादी दिक्कतें उजागर करेंगे।

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टीसीएस और इन्फोसिस का सिस्टम ही ऐसा है कि वह अमेरिकी ग्राहकों का काम करने के लिए उसे अपने कामकाजी बेड़े में विदेशी कुशल कामगारों को शामिल करना होता है। लेकिन, ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप वर्क वीजा प्रोग्राम में बड़े बदलाव के लिए कार्यकारी आदेश ड्राफ्ट कर रहे हैं।

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वीजा पर पाबंदियां लगाने से ऐपल जैसी अमेरिकी और विप्रो जैसी भारतीय कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी। कंपनियां अमेरिका इंजिनियरों की कमी को दूसरे देशों से भर्तियां कर पूरी करती हैं। लेकिन, वीजा प्रोग्राम में बदलाव के बाद कंपनियों को जॉब में अमेरिकियों को प्राथमिकता देनी होगी और अगर वो विदेशियों की भर्ती करेंगी तो उन्हें बहुत ज्यादा सैलरी देनी होगी। इससे विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना बहुत महंगा हो जाएगा।

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