H-1B वीज़ा मामला : ट्रंप के खिलाफ़ लामबंद हुईं भारतीय IT कंपनियां

0
ट्रंप
Prev1 of 3
Use your ← → (arrow) keys to browse

नई दिल्ली : देश की दिग्गज टेक्नॉलजी कंपनियों के प्रमुख इस महीने वॉशिंगटन जाकर वीजा नीति सख्त करने के खिलाफ अपनी राय रखेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मंशा H-1B वीजा प्रोग्राम को कड़ा करने की है। नैशनल असोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) के चीफ आर. चंद्रशेखर ने बताया कि 20 फरवरी को भारतीय कंपनियों के सीईओज अमेरिकी सांसदों से बात कर प्रेजिडेंट ट्रंप की भावना के विरुद्ध H-1B वीजा प्रोग्राम के लिए शर्तें बढ़ाने की बुनियादी दिक्कतें उजागर करेंगे।

इसे भी पढ़िए :  डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-चीन पर लगाया नौकरी चुराने का आरोप

टीसीएस और इन्फोसिस का सिस्टम ही ऐसा है कि वह अमेरिकी ग्राहकों का काम करने के लिए उसे अपने कामकाजी बेड़े में विदेशी कुशल कामगारों को शामिल करना होता है। लेकिन, ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप वर्क वीजा प्रोग्राम में बड़े बदलाव के लिए कार्यकारी आदेश ड्राफ्ट कर रहे हैं।

इसे भी पढ़िए :  भारत 8 प्रतिशत की दर से तरक्की कर सकता है तो अमेरिका क्यों नहीं: ट्रंप

वीजा पर पाबंदियां लगाने से ऐपल जैसी अमेरिकी और विप्रो जैसी भारतीय कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी। कंपनियां अमेरिका इंजिनियरों की कमी को दूसरे देशों से भर्तियां कर पूरी करती हैं। लेकिन, वीजा प्रोग्राम में बदलाव के बाद कंपनियों को जॉब में अमेरिकियों को प्राथमिकता देनी होगी और अगर वो विदेशियों की भर्ती करेंगी तो उन्हें बहुत ज्यादा सैलरी देनी होगी। इससे विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देना बहुत महंगा हो जाएगा।

इसे भी पढ़िए :  जापान में फूकुओका शहर के बीचो-बीच धंस गई सड़क

अगले पेज पर पढ़िए – ‘अगर अमेरिका ने अपना दरवाजा बंद किया तो उसे क्या खोना पड़ेगा’

Prev1 of 3
Use your ← → (arrow) keys to browse