सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब: धार्मिक गुरुओं के खिलाफ कैसे चल सकता है चुनाव कानून के तहत मामला ?

0
सुप्रीम कोर्ट
Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse

देश की सबसे बड़ी अदालत ने धर्म और राजनीति को मिलाना संविधान की भावना के खिलाफ बताया। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि संवैधानिक योजना का सार यही है कि राजनीति और धर्म अलग अलग रहें।

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की बेंच ने पूछा कि जो व्यक्ति न तो खुद चुनाव लड़ा और न ही विजयी उम्मीदवार बना, उसके खिलाफ कैसे जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत कथित रूप से भ्रष्ट क्रियाकलाप अपनाने का मामला चल सकता है।

इसे भी पढ़िए :  सुप्रीम कोर्ट ने RJD विधायक की गिरफतारी से किया इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें देखना होगा कि क्या ये व्याख्या संविधान की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति के अनुरूप होगी। क्या धर्म को चुनाव का हथियार बनाने की इजाजत दी जा सकती है। आपको बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

इसे भी पढ़िए :  बैंकों ने दी राहत, 2 लाख से ज्यादा जमा करने वालों को नहीं लगानी होगी लाईन

कोर्ट इस कानून की धारा 123 (3) के ‘दायरे’’की जांच कर रहा है जो ‘भ्रष्ट क्रियाकलापों’ वाली चुनावी कदाचार से संबंधित है।

इसे भी पढ़िए :  13 साल बाद पाकिस्तान के खिलाफ सेना की सबसे बड़ी कार्रवाई, पाक चौकियों पर जबर्दस्त हमला

पूरी खबर पढ़ने के लिए अगले स्लाइड में जाएं

Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse