इस गंगा-जमुना की सरस्वती कहीं मायावती तो नहीं बनने वाली हैं ? पढ़िए ये रिपोर्ट

0
3 of 3Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

भाजपा की राह रोकने के लिए पूरी ताकत से एकजुट हो रहे राजनीतिक दलों के लिए पिछले प्रयोग ही आधार बन रहे हैं। 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। तब सपा ने 256 और बसपा ने 164 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। बसपा को 67 और सपा को 109 सीटें मिली थीं। जाहिर तौर पर सपा-बसपा गठबंधन ने रिकार्ड बनाया और बड़े लाभ से भाजपा वंचित रह गयी थी। तब कांग्रेस के 264 उम्मीदवारों ने जमानत गंवा दी थी।

इसे भी पढ़िए :  मेयर ने पार्षदों को दिया वंदे मातरम गाने का निर्देश, विरोध करने पर मिली धमकी- हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा

3 of 3Next
Use your ← → (arrow) keys to browse