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वहीं सम्बंधित अधिकारियों का कहना है कि ये रूटीन का कार्य है। बजट जारी करने में देरी हुई थी, जिसके चलते काम देर में शुरू हुआ है।
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अखिलेश राज में बेहाल रहे इन पार्कों और स्मारकों के दिन फिरने लगे हैं। अधिकारी इसे भले ही रूटीन काम करार दें, लेकिन जिन पार्कों मे पिछले पांच साल में कोई अधिकारी झांकने तक नहीं आया, वहां अधिकारियों की चहलकदमी ये साफ दिखाती है कि अधिकारी कोई चांस लेने के मूड में नहीं हैं।
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