तीन तलाक का विरोध संविधान के खिलाफ- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

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तीन तलाक
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तीन तलाक जैसे महिलाओं के विरुध कुरीतियों को ख्तम करने और यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने के लिए लॉ कमीशन ने आम नागरिकों से राय लेने का फैसला लिया है जिसे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (MPLB) ने गलत माना है। MPLB का कहना है कि समान नागरिक संहिता इस देश के लिए अच्छा फैसला नहीं है। इस देश में कई धर्मों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं और हमें उन्हे सम्मान देना चाहिए।

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मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुसलमीन यानी एमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी प्रश्नावली में पूछे गए 16 सवालों को यूनिफॉर्म सिविल कोड के पक्ष में होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसे और भी ऑब्जेक्टिव होना चाहिए था। ओवैसी ने कहा कि हमारी पार्टी ने लॉ कमिशन की प्रश्नावली का जवाब देने का फैसला किया है।

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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी कर कहा कि लॉ कमिशन के 16 सवालों की लिस्ट धोखाधड़ी है। इसमें मौजूद सवाल एकतरफा हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड इस देश में संभव नहीं है। बोर्ड का कहना है कि मुस्लिमों ने भी इस देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी है लेकिन उनकी भागीदारी को हमेशा नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस देश का संविधान हमें अपने धर्म को मानने की छूट देता है।

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अगली स्लाईड में पढ़े बोर्ड ने उठाया पर्सनल लॉ को लेकर सवाल।

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