भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की गिरफ्तारी के बाद सहारनपुर में बिगड़ा माहौल, इंटरनेट सेवा बंद

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बता दें कि सहारनपुर में पहला दंगा 20 अप्रैल को हुआ था। तब सहारनपुर से बीजेपी के एमपी राघव लखनपाल शर्मा आंबेडकर जयंती का जुलूस बिना इजाजत निकाल रहे थे। उसमें हिंसा भड़क गई थी। जिसके बाद जिले के शब्बीरपुर गांव में महाराजा प्रताप जयंती के अवसर पर डीजे बजाने को लेकर ठाकुरों(राजपूत) और दलित समाज में 5 मई 2017 को बड़ा संघर्ष हुआ।

 

 

दलितों ने कथित तौर पर गांव से शोभायात्रा निकालने का विरोध किया और शोभायात्रा पर पथराव कर दिया। इस दौरान एक राजपूत युवक की मौत हो गई। शोभायात्रा पर पथराव की सूचना आसपास के गांवों के ठाकुर समाज के लोग भी वहां पहुंच गए। दोनों ओर से पथराव के साथ-साथ फायरिंग और तोड़फोड़ शुरू हो गई। इसके बाद शब्बीरपुल गांव के दलितों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई।

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इस दौरान दलितों के 60 से ज्यादा मकान जला दिए गए थे और कई वाहन फूंक दिए थे। इसके बाद दलितों की भीम आर्मी की तरफ से इस घटना का विरोध किया गया था। वहीं, पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए 9 मई 2017 को सहारनपुर में इकट्ठा हुए दलितों का पुलिस से संघर्ष हो गया था। इस दौरान सहारनपुर में नौ जगहों पर हिंसा हुई।

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इस मामले में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर को नामजद किया गया। जिसके विरोध में 21 मई 2017 को हजारों दलितों ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। वहीं, 23 मई 2017 को एक बार फिर मायावती के दौरे के बाद दलितों और ठाकुरों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें सात लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से बाद में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

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