बड़ा खुलासा : मोबाइल रेडिएशन से होता है ब्रेन ट्यूमर, लेकिन आपसे झूठ बोलती है मोबाइल कंपनियां

0
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse

डॉक्टरों के मुताबिक मोबाइल फोन के ऐंटेना से रेडियो वेव्ज निकती हैं। जो टिशूज ऐंटेना के सबसे नजदीक होते हैं, वे इस एनर्जी को सोख सकते हैं। खास तौर बच्चों के कान के नजदीक मौजूद नाजुक टिशूज को ब्रेन ट्यूमर का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। डॉक्टरों ने इस संबंध में लोगों को सलाह भी दी है। उनके मुताबिक, ‘सिर में रेडिएशन के खतरे को कम करने के लिए लोगों को वायरलेस हेडफोन या हेडसेट का इस्तेमाल करना चाहिए जिसमें कम पावर का ब्लूटूथ लगा हो। फोन पर ज्यादा लंबी बातें न करें। ज्यादा बात करने की बजाय मेसेज भेजें। यह सलाह खास तौर पर बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं के लिए है।’

इसे भी पढ़िए :  करेंगे खूब सेक्स और ये काम तो हार्ट अटैक का खतरा रहेगा कम

मोबाइल रेडिएशन की वजह से सिर्फ ब्रेन ट्यूमर की ही आशंका नहीं रहती, बल्कि सेहत से जुड़े कई और खतरे भी हो सकते हैं। मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से पुरुषों के वीर्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। इस संबंध में सरकार कई विज्ञान संस्थानों से शोध करवा रही है। बता दें कि साल 2011 में एक अंतर-मंत्रालयीन समिति ने कहा था कि मोबाइल टावरों को सघन रिहाइशी इलाकों, स्कूलों, खेल के मैदानों और अस्तपातों के नजदीक नहीं लगाना जाना चाहिए।

इसे भी पढ़िए :  राम रहीम पर फैसले से पहले मोबाइल इंटरनेट सेवा ठप

समिति ने एक रिसर्च की तरफ भी ध्यान दिलाया था जिसमें यह दावा किया गया था कि बड़े शहरों में तितलियों, मक्खियों, कीडों और गौरैया के गायब होने की वजह मोबाइल टावर से होने वाला रेडिएशन हो सकता है। हालांकि मोबाइल कंपनियों कई सीनियर वैज्ञानिकों का हवाला देकर कहती आई हैं कि मोबाइल टावर के रेडिएशन और सेहत को नुकसान के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।

इसे भी पढ़िए :  चांद पर तिरंगा फहरायेगी ये स्टार्टअप कंपनी, अंतरिक्ष यान भेजने का इसरो के साथ कॉन्ट्रेक्ट किया साइन
2 of 2Next
Use your ← → (arrow) keys to browse