चीन को भारत का जवाब, कहा- हम ‘तोहफे’ में नहीं चाहते NSG सदस्यता

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फाइल फोटो।

नई दिल्ली। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता को लेकर चीन के विवादित बयान पर भारत ने गुरुवार (19 जनवरी) को पलटवार करते हुए कहा कि वह 48 देशों वाले एनएसजी की सदस्यता तोहफे में नहीं, बल्कि परमाणु अप्रसार के अपने रिकॉर्ड की वजह से मांग रहा है।

दरअसल, भारत ने चीन के उस तंज का जवाब दिया है, जिसमें उसने कहा था कि एनएसजी की सदस्यता किसी को तोहफे के रूप में नहीं दिया जा सकता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा जाते-जाते किसी को ‘विदाई गिफ्ट’ के तौर पर एनएसजी सदस्यता नहीं दे सकते।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि भारत एनएसजी की सदस्यता तोहफे के तौर पर नहीं मांग रहा। भारत अप्रसार के अपने रिकॉर्ड के आधार पर यह मांग रहा है। साफ तौर पर पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए स्वरूप ने कहा कि बेशक, मैं अन्य आवेदकों की तरफ से नहीं बोल सकता।

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चीन की तरफ से तोहफे वाला बयान ओबामा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद आया जिसमें अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि एनएसजी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी की राह में चीन ‘रोड़ा’ है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान के बावजूद भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने विश्वास जताया था कि ट्रंप प्रशासन चीन द्वारा खड़ा की जा रही बाधाओं से पार पा जाएगा और भारत को इस प्रतिष्ठित ग्रुप का सदस्य बनाने में सहयोग करेगा। चीन, भारत की एनएसजी सदस्यता की राह में रोड़े अटका रहा है, क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किया है।

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