आरटीआइ से खुली सीबीआई के झूठ की पोल

0
आरटीआइ
Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse

नई दिल्ली: सीबीआइ ने एसडीएम दरियागंज की कोर्ट में बतौर नायब तैनात दिल्ली पुलिस के सिपाही को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार करने का दावा किया। सीबीआइ मामले में मजबूती के साथ अदालत में पेश हुई, लेकिन बचाव पक्ष की तरफ से पेश एक आरटीआइ के जवाब की कॉपी ने सीबीआइ की पोल खोल दी। अदालत ने आरोपी सिपाही को बरी कर दिया। ध्वनि प्रदूषण फैलाने के मामले में उसपर एक व्यवसायी से रिश्वत मांगने का आरोप था।

इसे भी पढ़िए :  उत्तराखंड: चुनाव में इस्तेमाल की गईं EVM को उच्च न्यायालय ने कोर्ट की निगरानी में रखने का दिया आदेश

सीबीआइ के हाजिरी रजिस्टर के रिकॉर्ड से पता चला कि जिस दिन जाल बिछाकर आरोपी सिपाही को पकड़ा गया, उस दिन मान सिंह नामक संयुक्त गवाह सीबीआइ दफ्तर गया ही नहीं था। अमूमन जाल बिछाकर किसी भी शख्स को पकड़ने से पूर्व संयुक्त गवाह के साथ बैठकर कागजी कार्यवाही पूरी की जाती है। पेश मामले में पता चला कि दो मई 2013 से 24 अगस्त 2013 के बीच यह संयुक्त सीबीआइ के दफ्तर में 27 बार गया। 17 अक्टूबर को छापेमारी से दो दिन पहले भी वह सीबीआइ दफ्तर गया, लेकिन घटना वाले दिन वह सीबीआइ दफ्तर गया ही नहीं।
अगले पेज पर पढ़िए- अदालत ने सीबीआइ से क्या कहा

इसे भी पढ़िए :  'सबजार' एक नाकाम प्रेमी के खूंखार आतंकी बनने की कहानी, पढ़कर चौंक जाएंगे आप
Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse