जिंदा पत्नी को चिता पर रखकर जला दिया !

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अलीगढ़ : ढाई महीने पहले घर से भागकर प्रेम विवाह रचाने वाली बुलंदशहर की जिस रचना के अधजले शव को कब्जे में लिया था, वो चिता पर रखे जाने से पहले जिंदा थी। यह हैरतअंगेज बात सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद सामने आई है। दो डॉक्टरों के पैनल ने सीएमओ के साथ घंटेभर मंथन के बाद पाया है कि रचना की मौत जलने के दौरान शॉक से हुई है। हालांकि, ग्रेटर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल के डॉक्टर ने चिता सजने के आठ घंटे पहले ही रचना को मृत बताते हुए इसका प्रमाण पत्र जारी किया था।

मूलत: बुलंदशहर जिले के स्याना कोतवाली क्षेत्र की छात्र रचना सिसौदिया ने 13 दिसंबर-16 को अलीगढ़ के गांव सपेरा भानपुर निवासी प्रेमी देवेश उर्फ देव चौधरी शादी की थी। यह विवाह आर्य समाज मंदिर, ग्रेटर नोएडा में हुआ था। देवेश के मां-बाप नहीं हैं। रचना का परिवार करीब 12 साल पहले अलीगढ़ के गांव बरौली वासुदेवपुर में बस चुका है। बीए की छात्रा रचना का यहां ननिहाल था। विवाह बाद दोनों भट्ठा पारसौल में रहने लगे। शनिवार देररात देवेश रचना का शव लेकर गांव पहुंचा था। रविवार तड़के गांव में ही दाह संस्कार शुरू हो गया। रचना के भाई की सूचना पर हरदुआगंज पुलिस पहुंची और जलती चिता से शव को निकाल लिया। तब तक शव 70 फीसद जल चुका था। रचना के मामा ने देवेश समेत 11 लोगों के खिलाफ दुष्कर्म कर हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। आरोपी फरार हो गए।

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सोमवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो सबके होश फाख्ता हो गए। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट में कहा गया है कि रचना की मौत जलने के दौरान शॉक से हुई है। डॉ. चरन सिंह व डॉ. पंकज मिश्र के पैनल ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने में करीब घंटेभर का समय लगाया। खुद सीएमओ डॉ एमएल अग्रवाल भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। डॉक्टरों ने डीएनए टेस्ट के लिए हड्डी का एक टुकड़ा भी संरक्षित कर पुलिस के सुपुर्द किया है।

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इसके पहले, आरोपी युवक के पक्षकारों ने पुलिस को दस्तावेज देते हुए बताया कि रचना काफी दिनों से बीमार चल रही थी। उसके फेफड़ों में पानी बताया गया था। 23 फरवरी को शारदा हॉस्पिटल में भर्ती भी कराया था। यहीं 25 फरवरी की रात 11.45 बजे मौत हो गई। अस्पताल की डॉ. शैला ने मृत्यु संबंधी प्रमाण पत्र भी जारी किया है। इस संबंध में शारदा अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि रचना के लंग्स में इंफेक्शन था, जिस कारण उसकी मौत हुई है।

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अगले पेज पर पढ़िए- पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने कैसे जाना कि जलाते वक्त जिंदा थी रचना

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