दोनों किडनियां फेल हैं, ICU में तैयारी कर पास की 12वीं की परीक्षा

0
किडनियां
Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse

परीक्षा में सफलता न मिलने पर आत्महत्या जैसे संगीन कदम उठाने वाले छात्रों के लिए अंशुल गौतम प्रेरणा हैं. 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने वाली अंशुल की दोनों किडनियां खराब हैं. तीन दिन में एक बार डायलिसिस करना पड़ता है और परीक्षा देने के लिए परिजन उसे आईसीयू से सेंटर तक ले जाते थे.

मध्यप्रदेश के शिवपुरी के अधिवक्ता अजय गौतम की बेटी अंशुल ने रविवार को घोषित सीबीएससी के 12वीं के नतीजें में 65 प्रतिशत अंक हासिल किए. अंशुल के फर्स्ट डिवीजन पास होने की सफलता माउंट एवरेस्ट फतह करने जैसी मुश्किलों से कम नहीं हैं. दरअसल, दिसंबर 2016 में पढ़ाई करने के दौरान अंशुल के चेहरे पर अचानक सूजन आ गई. स्थानीय डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में किडनियां  सूज जाने की बात कही, जिसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल लेकर गए. वहां एक महीने से अधिक समय तक आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान मेडिकल जांच में पता चला कि अंशुल की दोनों किडनियां फेल हैं. अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही परीक्षा की तारीख घोषित हो चुकी थी. स्कूल प्रिंसिपल ने अंशुल के पिता को फोन कर एग्जाम ड्रॉप करने सलाह दी. बेटी की हालत देख पिता भी इस बात पर सहमत हो गए थे.

इसे भी पढ़िए :  जम्मू के मेंढर में देखे गए 3 आतंकवादी, सर्च ऑपरेशन जारी

अंशुल इस बात के लिए कतई राजी नहीं थी. वह हर हालत में परीक्षा देने के लिए तैयार थी. अंशुल के पिता और आईटीबीपी में कमांडेंट चाचा रवि गौतम ने डॉक्टर से मशविरा किया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया. उनका कहना था कि परीक्षा सेंटर तक जाना तो दूर आईसीयू से बाहर जाने की हालत भी नहीं है.

इसे भी पढ़िए :  6 घंटे इंतजार के बाद भी नहीं मिली ऐम्बुलेंस, एएमयू के प्रोफेसर की दर्दनाक मौत

सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान अंशुल ने पढ़ाई जारी रखी. 25 जनवरी को उसकी एक सर्जरी भी हुई. 30 जनवरी को अस्पताल से छुट्टी हुई, तो वह दिल्ली से सीधे शिवपुरी पहुंच गई.

इसे भी पढ़िए :  केजरीवाल ने फिर बोला मोदी पर हमला, कहा: दिल्ली सरकार के फैसलों को अवैध घोषित कराने के प्रयास में केंद्र

अगले पेज पर पढ़िए – आईएएस बनना चाहती हैं अंशुल

Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse