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चाहे वो रिश्वत से कमाया जाने वाला रुपया हो, या फिर किसी सर्राफा व्यापारी के जरिए काला धन खपाने की कोशिश, यही नहीं एनजीओ चालक डोनेशन में मिलने वाली रकम को स्वाइपिंग मशीन के जरिए बड़े आराम से अपने निजी खाते में से निकाल सकते हैं  और हवाला कारोबारी भी इनके जरिए कालाधन ठिकाने लगाने की कोशिश में लगे हैं। और तो और इस मशीन के इस्तेमाल से सैक्स रैकेट चलाने वाला शख्स भी रोजना अपने ग्राहकों से पैस ले सकता है ? ये तमाम बाते हमारी इस तहकीकात में सामने आईं।

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अब सवाल ये है कि ऐसे लोगों को आखिर स्वाइप मशीनें देगा कौन? इसके लिए आपको इंडियन ओवरसिज बैंक का एक दस्तावेज दिखाते हैं, जिसमें साफ साफ लिखा है कि बचत खाता केवल आपकी बचत के लिए है ना कि बिजनेस करने के लिए। अब सवाल उठता है कि कुछ चुनिंदा निजी कंपनियां आखिर किस आधार पर लोगों को धडल्ले से उनके निजी खातों पर स्वाइपिंग मशीन मुहैया करा रही हैं।

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सवाल ये भी हैं कि..

1 – क्या निजी खातों पर स्वाइपिंग मशीन दी जा सकती है ?

2 – क्या निजी खातों से कोई रोजाना बिजनेस ट्रांजेक्शन कर सकता है ?

3 – क्या स्वाइपिंग मशीन मुहैया कराने से पहले केवाईसी अनिवार्य नहीं है ?

4 – क्या स्वाइपिंग मशीन देने से पहले खाता धारक का वेरिफिकेशन होना अनिवार्य नहीं है ?

5 – क्या जान बूझकर निजी कंपनियां अपनी मशीनें बेचने के लिए किसी को भी उसके निजी खातों पर स्वेपिंग मशीन मुहैया करा रही हैं, बगैर ये जानें कि उसका कोई व्यवसाय है या नहीं ?

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6 – क्या आरबीआई द्वारा स्वाइपिंग मशीनें मुहैया कराने को लेकर कोई स्पष्ट व सख्त दिशा निर्देश नहीं है ?

ये वो सवाल हैं जो लोगों को स्वाइपिंग मशीन मुहैया कराने वाली हर कंपनी के ज़हन में होने चाहिए। ताकि उसे पता रहे कि किस शख्स को स्वाइपिंग मशीन दी जानी चाहिए और किसे नहीं।

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