तीन तलाक मामला: मोबाइल, खत, मेल और मैसेज से दिए गए तलाक को भी मिली मान्यता, जरूर पढ़ें

0
3 of 5
Use your ← → (arrow) keys to browse

हाल ही में आठ दिसंबर को एक सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन तलाक (ट्रिपल तलाक) को लेकर बड़ी टिप्‍पणी की थी। हाईकोर्ट ने तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ क्रूरता बतायालऔर कहा है कि इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन होता है। तीन तलाक के मुद्दे पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक असंवैधानिक और महिला अधिकारों के खिलाफ है।

इसे भी पढ़िए :  झूठे वादे करके नहीं मांग पाएंगे वोट- सुप्रीम कोर्ट

खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी पर्सनल ला बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। गौरतलब हो कि, बीते कुछ दिनों से तीन तलाक को लेकर केंद्र सरकार और मुस्लिम संगठन आमने-सामने हैं।

हाईकोर्ट ने बुलंदशहर की हिना और उमरबी की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया। 24 वर्षीय हिना की शादी 53 साल के एक शख्स से हुई थी, जिसने उसे बाद में तलाक दे दिया।

इसे भी पढ़िए :  नवाजुद्दीन सिद्दीकी के बेटे के तस्वीर पर, ट्विटर पर मचा घमासान

हाईकोर्ट की टिपण्णी के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष कमाल फारुकी ने कहा कि इस्लाम महिलाओं के अधिकारों पर दुनिया के सबसे ज्यादा प्रगतिशील धर्मों में से एक है। तलाक शरीय लॉ का हिस्सा है, इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। मुझे खुशी है कि मेरी मुस्लिम बहनों को हक और इज्जत मिलेगी।

इसे भी पढ़िए :  खूबसूरती से परेशान थी महिला, जला लिया अपना चेहरा

अगले स्लाइड में पढ़ें – तीन तलाक को लेकर केन्द्र सरकार और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड आमने-सामने

3 of 5
Use your ← → (arrow) keys to browse