तीन तलाक मामला: मोबाइल, खत, मेल और मैसेज से दिए गए तलाक को भी मिली मान्यता, जरूर पढ़ें

0
4 of 5
Use your ← → (arrow) keys to browse

बीते सात अक्टूबर को तीन तलाक के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। सरकार का कहना है कि वो ट्रिपल तलाक का विरोध करती है। केंद्र ने कहा कि जेंडर इक्वेलिटी और महिलाओं की गरिमा ऐसी चीजें हैं, जिस पर समझौता नहीं किया जा सकता।

इसे भी पढ़िए :  सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल आज जाएगा कश्मीर, शांति बहाली की होगी कोशिश

हलफनामे में सरकार की तरफ से ये भी कहा गया है कि भारत में महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार देने से इनकार नहीं किया जा सकता। आगे कहा गया है कि ट्रिपल तलाक को धर्म के आवश्यक हिस्से के तौर पर नहीं लिया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक के विरोध में कई याचिकाएं दायर की गई थी, जिस पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हलफनामा दायर करते हुए कहा था कि ये याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सरकार से जवाब मांगा था। पिछले दिनों केंद्र ने जवाब दायर करने के लिए कोर्ट से चार हफ्तों का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मान लिया था।

इसे भी पढ़िए :  अरविंद केजरीवाल का बड़ा आरोप, बैठक में बाहर रखवाया मेरा फोन

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए।

अगले स्लाइड में पढ़ें – तीन तलाक को लेकर क्या कहता है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

इसे भी पढ़िए :  रोहित छिल्लर का इमोशनल अत्याचार, पत्नी की मौत के बाद फेसबुक पर रोए रोहित, कहा 'मैं निर्दोष हूं'
4 of 5
Use your ← → (arrow) keys to browse