अखिलेश बोले, जाति और धर्म के समीकरण के बजाय विकास की बात करने वालों को चुने जनता

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अखिलेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सियासत में जाति और धर्म के समीकरणों को स्वीकार करते हुए गुरूवार को कहा कि जनता को इन दो चीजों के अलावा विकास की बात करने वालों को चुनना चाहिये।

अखिलेश ने विधानमण्डल के मानसून सत्र के आखिरी दिन विधानसभा में कहा, ‘यह सच है कि जाति और धर्म के समीकरण काम करते हैं, लेकिन अपने समीकरण ठीक करने के बजाय आपको विकास के बारे में बात करनी चाहिये। जनता को ऐसे लोग चुनने चाहिये जो विकास की बात करें।’ बसपा सदस्यों की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें 10 साल पहले वर्ष 2007 में चुना था, मगर तब और अब वक्त बदल गया है, लोगों की प्राथमिकताएं बदल गयी हैं।

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अखिलेश ने कहा, ‘इस बदले हुए माहौल में हम एक बार फिर सरकार बनाएंगे। मौजूदा सरकार के पास छह महीने ही बचे हैं, लेकिन फिर भी प्रदेश में निवेश हो रहा है। इससे पता चलता है कि निवेशकों को सपा सरकार में भरोसा है और उन्हें यकीन है कि हम सत्ता में दोबारा आ रहे हैं।’ मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटाप, कन्या विद्याधन, मेट्रो तथा अन्य योजनाओं रूपी उपलब्धियों का जिक्र किया। वहीं, ‘बिजली का कोटा’ नहीं बढ़ाने पर केन्द्र सरकार की आलोचना भी की।

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इस मौके पर उन्होंने भाजपा पर भी तंज कसा और कहा कहा कि अच्छे दिन लाने और हर नागरिक के बैंक खाते में 15..15 लाख रूपये जमा करने का वादा करने वाली भाजपा के विपरीत उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने अपने सारे वादे पूरे किये हैं।

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अखिलेश ने हाल में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का जिक्र करते हुए कहा कि ‘मौर्या जी’ जैसे लोगों ने अपनी आस्था बदल ली। वह सदन में नहीं आए, क्योंकि उनके लिये आजम खां का सामना करना मुश्किल था।