बाबरी मस्जिद : 25 साल में 50 गवाहों की मौत, कैसे होगी कार्यवाई

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सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस में मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत 13 लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद दो एफआईआर दर्ज हुई थी। पहली एफआईआर संख्या 197 लखनऊ में दर्ज हुई। ये मामला ढांचा गिराने के लिए अनाम कारसेवकों के खिलाफ था। जबकि दूसरी फिर नंबर 198 को फैज़ाबाद में दर्ज किया गया। इस एफआईआर में आठ बड़े नेताओं के ऊपर मंच से हिंसा भड़काने का आरोप था। ये बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, साध्वी ऋतम्भरा, गिरिराज किशोर, अशोक सिंहल, विष्णु हरि डालमिया, उमा भारती और विनय कटियार थे।

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इस मामले में बाल ठाकरे, आचार्य गिरिराज किशोर, अशोक सिंगल, महंत अविद्यनाथ, परमहंस राम चंद्र दास और मोरेश्वर सावे का निधन हो चुका है। जबकि कल्याण सिंह पर राजस्थान के राज्यपाल होने के कारण मुकदमा नहीं चलाया जायेगा। इन सभी लोगों पर सेक्शन 120-बी के तहत मुकदमा चलाया जायेगा। इंडियन पेनल कोड, 1860 के मुताबिक, इस मामले में दोषी पाए जाने पर सजा ए मौत, आजीवन कारावास या फिर दो साल तक की सजा मिल सकती है।
कई गवाहों की हो चुकी है मौत
बाबरी मामले के सबसे अहम गवाह हाशिम अंसारी की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के 25 साल बाद अब तक इस मामले के अहम 50 से ज्यादा गवाहों की मौत हो चुकी है। आडवाणी के वकील ने उच्चतम न्यायालय में दलील दी कि अगर आपराधिक साजिश का मुकदमा फिर से चलाया गया, तो उन 183 गवाहों को दोबारा बुलाना होगा, जिनकी निचली अदालत में गवाही हो चुकी है। रायबरेली की अदालत में 57 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और अभी 100 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज करने बाकी हैं। लखनऊ की अदालत में 195 गवाहों की पेशी हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किये जाने हैं।

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