कैराना का सच: NHRC ने मुस्लिम युवकों को समझने में की गलती

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कैराना में मुस्लिम बहुलता

का्धंला की एक मस्जिद के मौलाना मोहम्‍मद मुस्‍तकीम कहते हैं कि हर हफ्ते यहां चोरी-डकैती होती हैं। उन्‍होंने कहा कि कैंपों में बिजली नहीं है, इसलिए वह आसान निशाना बनते हैं।  2013 के बाद मुजफ्फरनगर से मुस्लिम समुदाय के लगभग 25,000-30,000 सदस्यों को कैराना शहर में बसाने की वजह से कैराना का जनसांख्यिकी बदलकर मुस्लिम समुदाय के पक्ष में चला गया। 17 अक्‍टूबर को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों ने अपने कारोबार की वजह से शहर छोड़ा है। संस्‍था ने बताया कि 2011 जनसंख्‍या के अनुसार, कैराना की जनसंख्‍या 89,000 से ज्यादा थी, जिनमें 80 फीसदी से ज्‍यादा मुस्लिम थे। कांधला में करीब 70 फीसदी मुस्लिम थे।

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कैराना में पहले से मुस्लिमों की बहुलता होने पर जोर देते हुए कांधला नगर पालिका चेयरमैन और सपा नेता वाजिद हुसैन कहते हैं, 2,000 दंगा पीड़ितों के आ जाने से वे (मुस्लिम) और हावी नहीं हो जाते।  उन्‍होंने कहा, गिरती कानून-व्‍यवस्‍था की वजह से लोग गए होंगे, अगर ऐसा है तो राज्‍य सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। एनएचआरसी प्रवक्‍ता जैमिनी श्रीवास्‍तव ने कहा कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है और फिलहाल कुछ कहने को नहीं है।

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