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लालू यादव खुद अधिकांश विभाग के कामकाज में खुलकर दखलंदाजी भी करते हैं। जो आज की तारीख में अखिलेश ब्रांड की राजनीति और कामकाज की शैली से कहीं भी मेल नहीं खाता। हालांकि लालू से ज्यादा उनके बेटों को अब राजनीति के ब्रांड लालू और अखिलेश में से एक को चुनना होगा। ब्रांड लालू का अनुसरण कर वो सत्ता में एक हद तक जा सकते हैं, लेकिन ब्रांड अखिलेश को अपनाकर वो खासकर तेजस्वी यादव अपने जीवन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा कर सकते हैं.. अन्यथा बिहार में ब्रांड नीतीश तब तक चलता रहेगा जब तक वो सत्ता में बने रहना चाहते हैं।
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