हैकर्स के आगे घुटने टेकने को मजबूर हैं बैंक, नहीं है जरूरी सुरक्षा सिस्टम

0
हैकर्स
Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse

मुंबई : पिछले साल मई के अंत से लेकर जुलाई के अंत तक देश के पेमेंट्स नेटवर्क में सेंध लगाकर अभी तक के सबसे बड़े सायबर सिक्यॉरिटी क्राइम को अंजाम दिया गया था। इससे बहुत से विदेशी ट्रैवलर्स सहित बैंक कस्टमर्स के बैंक अकाउंट हैक होने की आशंका जताई गई थी। इससे हजारों लोगों को नुकसान उठाना पड़ा था। शुरुआती जांच में यह पता चला था कि हिताची के नेटवर्क में हैकर्स ने सेंध लगाई थी।

इसे भी पढ़िए :  20 अप्रैल को होगी मीटिंग, नोटबंदी के बाद जमा नोटों की पूरी जानकारी देंगे RBI गर्वनर

हिताची को कुछ बैंकों ने अपनी एटीएम ट्रांजैक्शंस की प्रोसेसिंग आउटसोर्स की थी। इसके बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने बैंकों को सायबर सिक्यॉरिटी बढ़ाने के लिए बहुत से सुझाव दिए थे। इसके साथ ही आरबीआई ने वीजा, मास्टरकार्ड और एनपीसीआई जैसी पेमेंट कंपनियों के साथ मीटिंग भी की थी। हिताची ने इस मामले की विस्तृत जांच के लिए बेंगलुरु की एक पेमेंट्स सिक्यॉरिटी फर्म को हायर किया था।

इसे भी पढ़िए :  नोटबंदी पर RBI गवर्नर ने कहा- लोगों की तकलीफ कम करने का कर रहे हैं काम

इस फर्म की ऑडिट रिपोर्ट पिछले सप्ताह आरबीआई को सौंपी गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के अधिकतर बैंकों और कंपनियों में इस्तेमाल किए जा रहे ऐंटी-वायरस और ऐंटी-मालवेयर डिवाइसेज सायबर हमलों का मुकाबला करने के लायक नहीं हैं। इसका मतलब है कि अगर हैकर्स की ओर से भेजे गए मालवेयर का कोड चतुराई से लिखा गया है तो वह अधिकतर ऐंटी-मालवेयर वॉल्स को भेद सकता है।

इसे भी पढ़िए :  अब iPhone 7 Plus में लगी आग, देखें वायरल वीडियो

अब्गले पेज पर पढ़िए- हैकर्स की होशियारी देखकर एक्सपर्ट्स भी हैरान

Prev1 of 2
Use your ← → (arrow) keys to browse