नोटबंदी का साइड इफेक्ट: कालाधन हो गया सफेद, बैंकों के पास कैश नहीं, ट्रेड और निवेश गिरा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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रणदीप सुरजेवाला के मुताबिक़ नोटबंदी की मार देश के हर तबक़े पर पड़ी है। वे सवालिया लहजे में सरकार से पूछते हैं कि जिन लोगों पर असर पड़ा है, उसके लिए सरकार क्या कर रही है।

उन्होंने कहा, “क्या मोदी जी देश भर के किसानों को हुए नुक़सान का भरपाई करेंगे। साढ़े 25 लाख मज़दूरों की नौकरियां गई हैं, क्या उनको बेरोज़गारी भत्ता देंगे। गरीब बीपीएल महिलाओं के खाते में क्या 25- 25 हज़ार डलवाएंगे। छोटे कारोबारियों का नुकसान हुआ, उसकी भरपाई के लिए क्या उन्हें एक साल तक सेल्स टैक्स और इनकम टैक्स में छूट देंगे।”

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इस नोटबंदी के फैसले से होने वाले फ़ायदे का अनुमान अब तक सरकार नहीं बता पाई है। नोटबंदी के फैसले के 50 दिन बाद के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ना तो ये बता पाए कि सरकार ने कितना काला धन पकड़ा है और ना ही ये भरोसा दे पाए कि ये मुश्किल कब तक बनी रहेगी।

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दो महीने बीतने के बाद भी सबसे बड़ी मुश्किल बैंकों में नोट की उपलब्धता को लेकर बनी हुई है। ऑल इंडिया बैंकिंग एम्पलाइज एसोसिएशन के महासचिव सी.एच. वेंकटचलम ने बीबीसी को बताया, “रिज़र्व बैंक वाले बोल रहे हैं, वित्त मंत्री बोल रहे हैं, प्रधानमंत्री बोल रहे हैं लेकिन लोगों को देने के लिए बैंकों के पास पैसा नहीं है।”

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वेंकटचलम के मुताबिक संकट की ये स्थिति देश के ग्रामीण इलाक़ों में भी बनी हुई है और शहरी इलाक़ों में भी। उनके दावे के मुताबिक़ अभी भी देश के आधे एटीएम में पैसा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

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